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राष्ट्रीय सर्वेक्षण में 9% छात्रों में आत्महत्या के विचार पाए गए
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय कार्यबल के सर्वेक्षण में पता चला कि 15% छात्र अभिभूत या संकटग्रस्त हैं, जबकि 9% ने पिछले छह महीनों में आत्महत्या के विचार दर्ज किए हैं।
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राष्ट्रीय कार्यबल द्वारा संचालित एक व्यापक देशव्यापी सर्वेक्षण में भारतीय छात्रों के बीच मानसिक स्वास्थ्य की चिंताजनक स्थिति सामने आई है। सर्वेक्षण के अनुसार, 15 प्रतिशत छात्र खुद को अभिभूत या मानसिक संकट की स्थिति में महसूस करते हैं। इससे अधिक चिंताजनक बात यह है कि 9 प्रतिशत छात्रों ने पिछले छह महीनों में आत्महत्या के विचारों की रिपोर्ट दी है।
यह आंकड़े शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य की गंभीरता को रेखांकित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शैक्षणिक दबाव, सामाजिक अपेक्षाएं और अन्य कारक छात्रों में तनाव और अवसाद का कारण बन रहे हैं।
राष्ट्रीय कार्यबल की अंतिम रिपोर्ट 31 अक्टूबर को प्रस्तुत किए जाने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट में विश्ववद्यालयों और स्कूलों में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण सिफारिशें शामिल होने की संभावना है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित इस कार्यबल का उद्देश्य देश भर में छात्रों के बीच आत्महत्या और मानसिक संकट की प्रवृत्ति का आकलन करना है। सर्वेक्षण के परिणाम सरकार, शिक्षा संस्थानों और नीति निर्माताओं के लिए कार्रवाई का आधार बनेंगे।