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विश्वव्यापी किशोरों का चौथाई हिस्सा रोज एक घंटा व्यायाम नहीं करता
एक नया वैश्विक अध्ययन चिंताजनक तस्वीर प्रस्तुत करता है: दुनियाभर में हर चौथा किशोर प्रतिदिन न्यूनतम 60 मिनट शारीरिक गतिविधि नहीं करता। लड़कियों की निष्क्रियता लड़कों की तुलना में काफी अधिक है।
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चिकित्सा जगत के प्रसिद्ध शोध पत्रिका लैंसेट द्वारा प्रकाशित एक व्यापक अध्ययन में यह तथ्य उजागर हुआ है कि विश्व के किशोर आबादी का एक बड़ा हिस्सा अनुशंसित स्तर की शारीरिक सक्रियता प्राप्त नहीं कर रहा है। शोध से पता चलता है कि लैंगिक आधार पर यह असमानता विशेष रूप से गंभीर है, जिसमें लड़कियां लड़कों की तुलना में कम सक्रिय पाई गई हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन किशोरों के लिए दैनिक कम से कम 60 मिनट की मध्यम से तीव्र शारीरिक गतिविधि की सिफारिश करता है। हालांकि, इस अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि यह लक्ष्य प्राप्त करना कितना दुर्लभ है। किशोरावस्था में पर्याप्त व्यायाम न करना हृदय स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण और समग्र विकास को प्रभावित करता है।
अध्ययन के निष्कर्ष युवा पीढ़ी की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता जताते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों, परिवारों और समाज को मिलकर किशोरों को अधिक सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। खासकर लड़कियों के लिए खेलकूद और व्यायाम को लेकर सांस्कृतिक बाधाओं को दूर करना महत्वपूर्ण है।