LSN News › India

World · India Bureau

एक लाख रुपये की तनख्वाह अब अपर्याप्त क्यों माना जा रहा है

भारत में नौकरी बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है जहां युवा कर्मचारी अब एक लाख रुपये मासिक वेतन को न्यूनतम मानने लगे हैं। बढ़ती आकांक्षाएं और बदलते जीवन स्तर के कारण अनुभवी पेशेवर इसी वेतन स्तर को अब अपर्याप्त मानने लगे हैं।

LSN India · 3 October 2026

एक लाख रुपये की तनख्वाह अब अपर्याप्त क्यों माना जा रहा है

देश की नौकरी बाजार में वेतन संबंधी अपेक्षाओं में उल्लेखनीय परिवर्तन हो रहा है। जहां कुछ साल पहले एक लाख रुपये मासिक वेतन प्राप्त करना एक प्रतिष्ठित उपलब्धि मानी जाती थी, वहीं आज अनुभवी पेशेवरों के लिए यह राशि अपर्याप्त होने लगी है। नए स्नातकों को इस आय स्तर तक पहुंचने के लिए निरंतर प्रयास करना पड़ रहा है।

कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाएं मुख्य रूप से जीवनयापन की बढ़ती लागत, शिक्षा में निवेश, आवास व्यय और स्वास्थ्य सेवाओं के बढ़ते खर्च से जुड़ी हैं। महानगरीय क्षेत्रों में खासकर ये कारण युवा और अनुभवी दोनों पेशेवरों को अधिक वेतन की मांग करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

इंडस्ट्री विश्लेषकों के अनुसार यह प्रवृत्ति आने वाले समय में और मजबूत होने की संभावना है। तकनीकी और पेशेवर कौशल रखने वाले कार्मिकों की मांग बढ़ने से उन्हें बेहतर मुआवजे की मांग करने की स्थिति मिल गई है। एक लाख रुपये की तनख्वाह अब आजीविका के न्यूनतम मानदंड के रूप में देखी जाने लगी है, न कि लक्ष्य के रूप में।