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ओएनजीसी का केजी बेसिन गहरे समुद्र में उत्पादन लक्ष्य से पिछड़ा
ओएनजीसी के प्रमुख केजी-डीडब्ल्यूएन-98/2 ब्लॉक से तेल का उत्पादन 20,000 बैरल प्रतिदिन तक गिर गया है, जबकि लक्ष्य 45,000 बैरल प्रतिदिन था। जटिल भूवैज्ञानिक संरचना उत्पादन को बनाए रखने में बाधा बन रही है।
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कृष्णा-गोदावरी बेसिन में ओएनजीसी के प्रमुख गहरे समुद्री क्षेत्र में तेल उत्पादन में मंदी देखी जा रही है। केजी-डीडब्ल्यूएन-98/2 ब्लॉक से तेल निकासी वर्तमान में लगभग 20,000 बैरल प्रतिदिन पर है, जो प्रारंभिक लक्ष्य के आधे से भी कम है। यह क्षेत्र शुरुआत में 45,000 बैरल प्रतिदिन के उत्पादन स्तर पर पहुंचने की संभावना रखता था।
इस निराशाजनक प्रदर्शन के पीछे भूवैज्ञानिक जटिलताएं मुख्य कारण बताई जा रही हैं। कृष्णा-गोदावरी बेसिन की जटिल भूवैज्ञानिक संरचना और भंडार की विशेषताएं उत्पादन को सुचारू रूप से बनाए रखना मुश्किल बना रही हैं। इन चुनौतियों के कारण तेल निष्कर्षण की दक्षता प्रभावित हुई है।
भारतीय तेल निगम के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि केजी बेसिन घरेलू तेल उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गहरे समुद्री क्षेत्रों में खनन अपनी तकनीकी जटिलताओं और उच्च लागत के लिए जाना जाता है। इन परिस्थितियों में उत्पादन को स्थिर करना एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र से संभावित उत्पादन लक्ष्य को पुनः परिभाषित करने की आवश्यकता हो सकती है। तकनीकी समाधान और भूवैज्ञानिक अध्ययन में निवेश बढ़ाकर उत्पादन बेहतर किया जा सकता है। आने वाले महीनों में इस मुद्दे पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।