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भारत में स्नातकों का बड़ा संकट: केवल 8.25% को मिलता है योग्यता के अनुरूप काम
नीति आयोग ने भारत में शिक्षा और रोजगार के बीच गंभीर विसंगति की ओर ध्यान दिलाया है। रिपोर्ट के अनुसार, महज 8.25 प्रतिशत स्नातक ही अपनी योग्यता के अनुरूप नौकरी पा रहे हैं।
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नीति आयोग की हालिया रिपोर्ट में भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली की गंभीर कमजोरियों का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट से पता चलता है कि देश में स्नातकों का एक बड़ा हिस्सा ऐसी नौकरियों में लगा है जो उनकी शैक्षणिक योग्यता से मेल नहीं खाती। इस चिंताजनक प्रवृत्ति से न केवल मानव संसाधन की बर्बादी हो रही है बल्कि राष्ट्रीय विकास पर भी असर पड़ रहा है।
नीति आयोग की विश्लेषण में कौशल में कमी, व्यावहारिक प्रशिक्षण की अपर्याप्तता और उद्योग के साथ सीधे जुड़ाव की कमी को इस समस्या के मुख्य कारण के रूप में चिह्नित किया गया है। विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदान की जाने वाली शिक्षा वर्तमान बाजार की मांग के साथ तालमेल नहीं बिठा पा रही है। नतीजतन, लाखों स्नातक ऐसे क्षेत्रों में काम करने के लिए मजबूर हो रहे हैं जहां उन्हें अपनी योग्यता का सदुपयोग नहीं हो सकता।
यह अध्ययन भारत की शिक्षा नीति में सुधार की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि उद्योग-शिक्षा सहयोग को मजबूत करने, इंटर्नशिप कार्यक्रमों को बढ़ावा देने और पाठ्यक्रम में व्यावहारिक कौशल को शामिल करने से इस खाई को पाटा जा सकता है। सरकार और निजी क्षेत्र दोनों को मिलकर ऐसा माहौल तैयार करना होगा जहां स्नातकों को अपनी योग्यता के अनुसार रोजगार के अवसर मिल सकें।