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चुनाव आयोग पर 90 लाख मतदाता पहचान पत्र मुद्रित करने का आरोप
विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने राज्य चुनाव आयोग पर आचरण संहिता का उल्लंघन करके बेंगलुरु में 90 लाख मतदाता पहचान पत्र छापने का आरोप लगाया है। अशोक का दावा है कि यह कार्य चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन संशोधन की घोषणा के बाद किया गया था।
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विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने राज्य चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उसने ग्रेटर बेंगलुरु क्षेत्र के प्रस्तावित चुनावों में अनियमितताओं को सुविधाजनक बनाने के लिए मानदंडों का उल्लंघन किया है। अशोक के अनुसार, चुनाव आयोग द्वारा विशेष गहन संशोधन की घोषणा किए जाने के बाद राज्य चुनाव आयोग ने बेंगलुरु में 90 लाख मतदाता पहचान पत्र मुद्रित किए हैं।
विपक्ष के नेता ने बताया कि इन पहचान पत्रों को मुद्रित करने में लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। अशोक का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया चुनाव संबंधी नियमों और प्रक्रियाओं के खिलाफ थी और इसका उद्देश्य आसन्न चुनावों में अनियमितताओं को बढ़ावा देना था।
आरोपों का राज्य चुनाव आयोग ने खंडन किया है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और दावा किया है कि सभी कार्य निर्धारित नियमों के अनुसार किए गए थे। आयोग ने कहा है कि मतदाता पहचान पत्रों का मुद्रण स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा था।
यह विवाद बेंगलुरु शहर के चुनावों को लेकर राजनीतिक तनाव को दर्शाता है। अशोक की पार्टी चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है जबकि आयोग अपनी कार्यप्रणाली की वैधता बरकरार रखे हुए है।