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मंत्रियों के बंगलों पर खर्च को लेकर विपक्ष का सवाल, स्कूलों में निवेश की मांग
केंद्र सरकार ने 2025-26 में संघीय मंत्रियों के आवासों की मरम्मत और रखरखाव पर रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस पर विपक्षी दल ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए शिक्षा क्षेत्र में अधिक निवेश की मांग की है।
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केंद्र सरकार के विलासवान आवासों पर किए गए रिकॉर्ड खर्च को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सूत्रों के अनुसार, संघीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों की देखभाल, नवीनीकरण और मरम्मत के लिए चालू वित्त वर्ष में 92.35 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है, जो पिछले वर्षों में सर्वाधिक है।
विपक्षी दल कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने इस खर्च को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। दल के नेताओं का मानना है कि सरकार अपनी वित्तीय प्राथमिकताओं को गलत दिशा में लगा रही है। उन्होंने कहा कि जहां देश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की कमी है, वहां मंत्रियों के आवासों पर इतना भारी निवेश करना समझदारी नहीं है।
विपक्ष का तर्क है कि यही राशि अगर शिक्षा क्षेत्र में लगाई जाए तो देश के लाखों बच्चों को बेहतर स्कूल सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं। सीजेपी नेताओं ने मांग की है कि सरकार अपनी खर्च की नीति पर तुरंत पुनर्विचार करे और जनकल्याण के क्षेत्रों में अधिक धन आवंटित करे।
यह मुद्दा आने वाले हफ्तों में संसद में उठाया जाने की संभावना है, जहां सरकार को अपनी खर्च की नीति के बारे में सवालों का सामना करना पड़ सकता है।