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जंतर मंतर के विरोध स्थल का दर्जा रद्द करने पर विपक्ष में आक्रोश
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार लोकतंत्र को नजरअंदाज कर रही है। भारतीय युवा कांग्रेस के संस्थापक का आरोप है कि सरकार प्रतिरोध की भावना को दबाने का प्रयास कर रही है।
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नई दिल्ली। जंतर मंतर को आधिकारिक विरोध स्थल के रूप में मान्यता रद्द करने के निर्णय के विरुद्ध विपक्षी दलों में तीव्र प्रतिक्रिया हुई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने इस कदम को लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध बताया और कहा कि गृह मंत्री तथा प्रधानमंत्री के लिए अब लोकतंत्र की कोई परवाह नहीं रह गई है। उन्होंने इस निर्णय को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक गंभीर हमला माना।
भारतीय युवा कांग्रेस के संस्थापक अभिजीत दिप्के ने भी मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जंतर मंतर प्रतिरोध की एक भावना है जिसे कोई भी हटा नहीं सकता। दिप्के के अनुसार, सरकार का यह कदम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को सीमित करने का एक प्रयास है।
विपक्षी दलों का मानना है कि यह निर्णय शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को कमजोर करने के लिए एक संगठित प्रयास है। कई राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जंतर मंतर दशकों से नागरिकों के लिए अपनी आवाज उठाने का मंच रहा है।
जंतर मंतर के विरोध स्थल के रूप में दर्जे को रद्द करने का निर्णय कुछ समय पहले अधिसूचित किया गया है। यह कदम विभिन्न हलकों में विवाद का विषय बना हुआ है और राजनीतिक तनाव में वृद्धि कर रहा है।