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एचआईवी रोगियों के लिए नया जीवन: जयदेवा में 1,209 को हृदय सर्जरी
एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी में तरक्की के साथ एचआईवी रोगियों की जीवन प्रत्याशा बढ़ी है। इसने हृदय रोग सहित दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया है।
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जयदेवा इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी में 2013 के बाद से 1,209 एचआईवी पॉजिटिव रोगियों को हृदय संबंधी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा है। यह आंकड़ा आधुनिक चिकित्सा उपचार में आई क्रांतिकारी बदलाव को दर्शाता है, जहां एचआईवी अब एक असाध्य रोग नहीं बल्कि एक प्रबंधनीय दीर्घकालिक स्थिति बन गई है।
एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) में उल्लेखनीय प्रगति के कारण एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जीवन अवधि में महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है। जब लोग अधिक लंबे समय तक जीवित रहते हैं, तो अन्य स्वास्थ्य जटिलताएं सामने आती हैं, विशेषकर हृदय रोग और संबंधित समस्याएं।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि एचआईवी रोगियों में कार्डियोवैस्कुलर रोग का जोखिम सामान्य जनसंख्या की तुलना में अधिक होता है। यह विभिन्न कारकों जैसे वायरस का प्रभाव, दवाओं के दुष्प्रभाव और जीवनशैली संबंधी समस्याओं का परिणाम है।
जयदेवा इंस्टीट्यूट जैसे अग्रणी चिकित्सा केंद्रों की भूमिका एचआईवी रोगियों में हृदय संबंधी समस्याओं की पहचान और उपचार में महत्वपूर्ण साबित हुई है। विशेषज्ञ टीमें एचआईवी संक्रमित और हृदय रोग से पीड़ित रोगियों के लिए समन्वित चिकित्सा सेवाएं प्रदान कर रही हैं, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार आ रहा है।