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चुनाव आयोग की कार्रवाई पर रोक लगाने को लेकर 2000 से अधिक नागरिकों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा
नागरिकों ने मतदाता पंजीकरण सॉफ्टवेयर में मनमानी बदलावों की जांच की मांग की है। पत्र में चुनाव आयोग के संचालन पर स्वतः संज्ञान लेने की भी अपील की गई है।
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देश भर से 2000 से अधिक नागरिकों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें चुनाव आयोग के विरुद्ध कार्रवाई को तत्काल रोकने की मांग की गई है। पत्र में कहा गया है कि उच्च न्यायालय द्वारा जारी किसी भी आदेश को लागू करने से पहले मुख्य न्यायाधीश हस्तक्षेप करें।
नागरिकों का दावा है कि मतदाता पंजीकरण से संबंधित सॉफ्टवेयर और फॉर्मों में अनाधिकृत और मनमानी बदलावां किए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि इन परिवर्तनों की जांच एक स्वतंत्र और न्यायालय द्वारा निरीक्षित जांच के माध्यम से की जानी चाहिए।
पत्र में चुनाव आयोग के संचालन और इसके कार्यों की पारदर्शिता संबंधी मुद्दों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है। नागरिकों का कहना है कि मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया में इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करती है।
इस मुद्दे पर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग संविधान की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े किसी भी संदेह को दूर करना लोकतंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।