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मुंबई में 71 फीसदी उपभोक्ता दवाइयां लेते समय डॉक्टरी पर्चा नहीं मांगते
मुंबई में एक सर्वेक्षण में सामने आया कि अधिकांश दवा दुकानों पर बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाइयां दी जा रही हैं। महाराष्ट्र एफडीए ने इसी अवधि में 880 ड्रग लाइसेंसीधारकों के खिलाफ कार्रवाई की है।
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मुंबई में दवा खरीद के संबंध में किए गए एक सर्वेक्षण ने स्वास्थ्य नियमों के प्रति चिंताजनक रुख उजागर किया है। 3,697 मुंबईकरों पर किए गए इस सर्वेक्षण में पाया गया कि 71 फीसदी उपभोक्ता दवाइयां खरीदते समय शायद ही कभी डॉक्टरी पर्चा (प्रिस्क्रिप्शन) मांगते हैं।
सर्वेक्षण की अधिक विस्तृत जानकारी के अनुसार, 36 फीसदी प्रतिवादियों ने बताया कि दवा दुकानदार ने उन्हें बिना पर्चे के दवाइयां देने से कभी मना नहीं किया। एक अन्य 35 फीसदी ने कहा कि दुकानदार यह इनकार बहुत ही कम करते हैं। यह आंकड़े दवा बिक्री के प्रचलित मानदंडों में गंभीर खामियों की ओर संकेत करते हैं।
इसी संदर्भ में, महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने पिछले तीन महीनों में 880 ड्रग लाइसेंसीधारकों के खिलाफ कार्रवाई की है। यह कदम नियामक प्राधिकरण द्वारा दवा बिक्री के नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया प्रयास प्रतीत होता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ अक्सर इस बात पर जोर देते हैं कि बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाइयां खरीदना जनता के स्वास्थ्य के लिए जोखिमपूर्ण है। इससे दवाओं का दुरुपयोग, एंटीबायोटिक प्रतिरोध और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। नियामक कार्रवाई के साथ-साथ जनसचेतना भी इस समस्या से निपटने के लिए आवश्यक है।