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सरकारी स्कूलों में एक-चौथाई शिक्षक नियमित रूप से कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करते हैं
भारतीय सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के बीच कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रयोग बढ़ रहा है। एक नई रिपोर्ट में पाया गया है कि लगभग 26 प्रतिशत सरकारी स्कूलों के शिक्षक नियमित रूप से एआई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं और इसके प्रति उनका रुख सकारात्मक है।
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सरकारी शिक्षा संस्थानों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अनुप्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश भर के सरकारी विद्यालयों में एक-चौथाई के करीब शिक्षक अपनी दैनिक कार्यप्रणाली में एआई उपकरणों को नियमित आधार पर अपना रहे हैं।
रिपोर्ट में उजागर हुआ है कि इस तकनीक के प्रति शिक्षकों की सामूहिक धारणा बेहद सकारात्मक है। लगभग 72 प्रतिशत शिक्षक कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एक उपयोगी साधन मानते हैं जो उनके शिक्षण कार्य को अधिक प्रभावी बना सकता है। यह आंकड़े शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की ओर एक सकारात्मक प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।
शिक्षकों द्वारा एआई का उपयोग व्यक्तिगत शिक्षण सहायता, पाठ्यक्रम निर्माण और छात्र मूल्यांकन जैसे विभिन्न कार्यों में किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति विशेषकर उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जहां शिक्षकों की कमी महसूस की जाती है।
शिक्षा विशेषज्ञ इस विकास को भारतीय शिक्षा व्यवस्था में आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ इस बात पर भी जोर देते हैं कि एआई को मानवीय स्पर्श की जगह नहीं लेनी चाहिए, बल्कि इसे शिक्षण प्रक्रिया को बेहतर बनाने का एक साधन माना जाना चाहिए।