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भारतीय कॉलेज छात्रों में उद्यमिता की बढ़ती प्रवृत्ति, 22 प्रतिशत ने शुरू किया कारोबार
भारत में कॉलेज के छात्रों में स्वरोजगार की ओर झुकाव तेज हो रहा है। गेस इंडिया 2025 की रिपोर्ट में पाया गया है कि लगभग पांचवां हिस्सा छात्र अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं।
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भारत के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है जहां कॉलेज के छात्र पारंपरिक नौकरी की जगह स्वयं के व्यवसाय के प्रति अधिक आकर्षित हो रहे हैं। गेस इंडिया 2025 की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, देश भर के कॉलेजों में अध्ययनरत करीब 22 प्रतिशत छात्र पहले से ही किसी न किसी व्यावसायिक गतिविधि में संलग्न हैं।
यह आंकड़े युवाओं की मानसिकता में आ रहे बदलाव को दर्शाते हैं। जहां पहले कॉलेज से पास करने के बाद नौकरी तलाशना छात्रों का मुख्य लक्ष्य माना जाता था, वहीं अब एक बड़ा वर्ग अपनी स्वतंत्र पहचान बनाना चाहता है और जोखिम लेने को तैयार है।
रिपोर्ट में एक और महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया है कि जिन छात्रों के पास पहले से ही कारोबारी परिवार की पृष्ठभूमि है, उनमें व्यवसाय शुरू करने की संभावना तीन गुना अधिक होती है। यह बात परिवार के अनुभव और सलाह-सुझाव की भूमिका को रेखांकित करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल तकनीक, सरकारी योजनाओं और बेहतर वित्तीय सहायता के कारण युवा उद्यमिता को बढ़ावा मिल रहा है। यह प्रवृत्ति आने वाले समय में भारत की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।