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सात राज्यों में पराली जलाने की घटनाएं 26.6% घटीं; पंजाब में सर्वाधिक मामले
15 सितंबर से 1 नवंबर के बीच सात राज्यों में पराली दहन की घटनाएं घटकर 3,316 रह गईं, जो पिछले साल की तुलना में 26.63% की कमी दर्शाती है। पंजाब ने इन मामलों का लगभग आधा हिस्सा दर्ज किया।
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भारत के प्रमुख कृषि क्षेत्रों में पराली दहन की घटनाओं में सकारात्मक रुझान देखा जा रहा है। सितंबर के मध्य से नवंबर की शुरुआत तक की अवधि में सात राज्यों में कुल 3,316 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं, जो पिछली अवधि की तुलना में 26.63% की गिरावट का संकेत देती है।
पंजाब राज्य ने इस कुल संख्या में सबसे अधिक योगदान दिया है, जहां लगभग आधी घटनाएं दर्ज की गईं। यह क्षेत्र खरीफ मौसम के बाद बड़े पैमाने पर धान की पराली दहन के लिए जाना जाता है। अन्य प्रभावित राज्यों में भी पराली जलाने की घटनाओं में गिरावट का रुझान देखा गया है।
पराली दहन वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण रहा है, विशेषकर उत्तरी भारत में। इस समस्या से निपटने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें किसानों को वैकल्पिक तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं। पराली प्रबंधन के लिए सब्सिडी और आधुनिक यंत्रों की सुविधा प्रदान की जा रही है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा सतत निगरानी और स्थानीय प्रशासन की सक्रिय भूमिका इस सकारात्मक प्रवृत्ति में महत्वपूर्ण साबित हुई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि पराली दहन को पूरी तरह रोकने के लिए अभी और प्रयासों की आवश्यकता है।