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शिक्षक ही सर्वश्रेष्ठ शिक्षार्थी: सत्यनारायणन मुंडयूर की शिक्षा यात्रा
पद्म श्री पुरस्कार विजेता सत्यनारायणन मुंडयूर का जीवन दशकों से अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों में बिताया गया है, जहां उन्होंने हजारों छात्रों में जिज्ञासा और पढ़ने का प्रेम जगाया। उनके लिए शिक्षा मात्र एक पेशा नहीं, बल्कि एक आजीवन सीखने की प्रक्रिया रही है।
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सत्यनारायणन मुंडयूर के नाम की गूगल सर्च करने पर सबसे पहली जानकारी उनके 2020 के पद्म श्री पुरस्कार के बारे में मिलती है। लेकिन यह सम्मान उनकी वास्तविक पहचान का केवल एक हिस्सा है। इन्हीं दशकों में उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में जो योगदान दिया है, वह किसी भी पुरस्कार से परे है।
मुंडयूर का शिक्षा कार्य कक्षाओं और पुस्तकालयों से शुरू होता है, लेकिन यह अरुणाचल प्रदेश की पहाड़ियों तक फैला हुआ है। यहां वह पीढ़ियों से छात्रों को पढ़ा रहे हैं, उनमें जिज्ञासा जगा रहे हैं, और सीखने का आनंद साझा कर रहे हैं। सैकड़ों बच्चों के लिए वह केवल एक शिक्षक नहीं हैं—वह "अंकल मूसा" हैं, एक विश्वस्त मार्गदर्शक।
मुंडयूर का दृष्टिकोण परंपरागत शिक्षण से आगे जाता है। उनके लिए एक शिक्षक का काम कभी खत्म नहीं होता। वह स्वयं एक निरंतर शिक्षार्थी रहे हैं, अपने छात्रों से सीखते हैं, और हर दिन नए तरीकों से ज्ञान प्रदान करने का प्रयास करते हैं।
अरुणाचल प्रदेश जैसे दूरदराज के क्षेत्र में शिक्षा का प्रचार करने वाले ऐसे समर्पित शिक्षकों की भूमिका अमूल्य है। मुंडयूर की कहानी यह साबित करती है कि सच्ची शिक्षा वह है जो न केवल किताबें पढ़ाती है, बल्कि जीवन भर सीखने की भूख को जगाए रखती है।