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मक्का पैक्ट को लेकर पाकिस्तान की अस्पष्ट रुख, सऊदी अरब को सैन्य समर्थन में संकोच
पाकिस्तान ने सऊदी अरब के खिलाफ हूती हमलों के मुद्दे पर अपनी स्थिति में तेजी से बदलाव किया है। रक्षा मंत्री द्वारा मक्का समझौते को सक्रिय करने की घोषणा के बाद पाकिस्तान ने अपने बयान से पीछे हटते हुए सैन्य हस्तक्षेप के प्रति संदेह जताया है।
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इस्लामिक सहयोग संगठन के तहत 2015 में स्थापित मक्का पैक्ट को लागू करने पर पाकिस्तान की अनिच्छा सऊदी अरब के लिए चिंता का विषय बन गई है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने शुरुआत में घोषणा की थी कि समझौते की शर्तों को क्रियान्वित किया जाएगा, लेकिन कुछ ही घंटों में इस्लामाबाद ने अपने रुख में स्पष्ट परिवर्तन दिखाया।
मक्का पैक्ट के अंतर्गत सदस्य राष्ट्रों को एक-दूसरे के विरुद्ध बाहरी खतरों में सामूहिक सुरक्षा प्रदान करने की बाध्यता है। हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए हमलों को लेकर पाकिस्तान की भूमिका को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
यह घटनाक्रम इस बात को दर्शाता है कि पाकिस्तान मध्य पूर्वी संकटों में प्रत्यक्ष सैन्य भूमिका निभाने के प्रति कितना सावधान है। रणनीतिक हितों और अंतर्राष्ट्रीय दायित्वों के बीच संतुलन बनाते हुए इस्लामाबाद ने सूक्ष्म कूटनीति का रास्ता अपनाया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह पाकिस्तान की सामर्थ्य और क्षेत्रीय राजनीति की जटिलताओं को दर्शाता है। मक्का पैक्ट के वास्तविक कार्यान्वयन को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेद भविष्य में सामूहिक सुरक्षा तंत्र की कार्यकुशलता पर सवाल उठाता है।