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पाकिस्तान के 'ऐतिहासिक मील के पत्थर' पर सवाल उठाए पूर्व आईएमएफ निदेशक
पाकिस्तान द्वारा किए गए आर्थिक सफलता के दावों को लेकर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पूर्व निदेशक ने संशय व्यक्त किया है। विशेषज्ञ का मानना है कि इन दावों की वास्तविकता से गहरा अंतर संबंध नहीं है।
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पाकिस्तान सरकार द्वारा अपनी आर्थिक नीतियों के मामले में 'ऐतिहासिक मील के पत्थर' होने का जो दावा किया गया है, उस पर अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से जुड़े एक वरिष्ठ विशेषज्ञ ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पूर्व आईएमएफ निदेशक का यह मत इस बात को रेखांकित करता है कि इस्लामाबाद की सकारात्मक घोषणाएं वास्तविक जमीनी हालात से काफी अलग हो सकती हैं।
विशेषज्ञ के अनुसार, पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति में सुधार दिखाने वाले आधिकारिक बयानों की पड़ताल करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा है कि महज़ घोषणाओं से ही यह नहीं समझा जा सकता कि देश की अर्थव्यवस्था वास्तव में किस दिशा में जा रही है। पाकिस्तान को आईएमएफ के साथ कई बार बेलआउट पैकेज लेने पड़े हैं, जिससे आर्थिक स्थिरता के संबंध में अनिश्चितता बनी हुई है।
आर्थिक विश्लेषकों का सुझाव है कि पाकिस्तान को अपनी आर्थिक नीतियों में कड़ोर सुधार करने की जरूरत है। राजकोषीय अनुशासन और संरचनात्मक सुधारों के बिना दीर्घकालिक आर्थिक विकास संभव नहीं दिखता। क्षेत्रीय अर्थशास्त्रियों का मानना है कि केवल राजनीतिक घोषणाओं से हटकर ठोस आर्थिक संकेतकों पर ध्यान देना होगा।