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मक्का की रक्षा के लिए समझौते की जरूरत नहीं: पाकिस्तान
पाकिस्तान ने कहा है कि पवित्र नगर मक्का की रक्षा के लिए किसी औपचारिक समझौते की आवश्यकता नहीं है क्योंकि मुसलमान पहले से ही इसकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस बयान से इस्लामिक दुनिया की एकता का संदेश दिया जा रहा है।
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पाकिस्तान ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि पवित्र शहर मक्का पर किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए औपचारिक समझौते की आवश्यकता नहीं है। इस्लामाबाद का तर्क है कि मक्का की सुरक्षा सभी मुसलमानों के लिए एक स्वाभाविक और अनिवार्य कर्तव्य है।
पाकिस्तान के इस रुख में हाल के राजनीतिक माहौल को लेकर सूक्ष्म परिवर्तन देखा जा रहा है। पहले इस्लामाबाद ने मक्का समझौते (मक्का पैक्ट) के बारे में कहा था कि यह समझौता पुरानी विवादास्पद मुद्दों पर लागू नहीं होगा। अब वह इस मसले को पूरी तरह अलग नज़रिये से प्रस्तुत कर रहा है।
इस्लामिक दुनिया की सुरक्षा के संदर्भ में पाकिस्तान का यह बयान इस बात को दर्शाता है कि धार्मिक और सुरक्षा संबंधी मामलों में पाकिस्तान मुसलमानों के बीच एकता और सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दे रहा है। इस्लामिक दुनिया के पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान की ओर से यह रुख देश की सामरिक नीति का भी प्रतिफलन है।
मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों और क्षेत्रीय तनाव के बीच इस्लामिक एकता और सुरक्षा के प्रश्न अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। पाकिस्तान का यह बयान इस व्यापक संदर्भ में दिया गया है।