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वागा-अटारी सीमा पार कर भारत में शादी रचाने आईं 150 पाकिस्तानी सिंधी दुल्हनें
सिंधी समुदाय की परंपरागत विवाह प्रथाओं को बनाए रखने के लिए पाकिस्तान से आने वाली महिलाओं को वीजा संबंधी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है। पंजाब की वागा-अटारी सीमा इन विवाहों के लिए प्रमुख मार्ग बन गई है।
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सिंधी समुदाय की एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा को जारी रखने के लिए पाकिस्तान से आने वाली करीब 150 दुल्हनों को वीजा संबंधी बाधाओं को पार करना पड़ा है। ये महिलाएं भारत में अपने रिश्तेदारों से विवाह करने के लिए यात्रा करती हैं, जो सिंधी परिवारों के बीच एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक परंपरा है।
इस समुदाय के सदस्य परंपरागत रूप से पंजाब में स्थित वागा-अटारी सीमा क्षेत्र से होकर भारत आते हैं। यह सीमा चौकी वर्षों से इन आंतर-सीमावर्ती विवाहों का प्रमुख प्रवेश बिंदु रहा है। पाकिस्तानी सिंधी समुदाय के सदस्यों के लिए विवाह समारोहों में शामिल होने के उद्देश्य से वीजा प्राप्त करना अक्सर जटिल और समय-सापेक्ष होता है।
इन महिलाओं द्वारा की गई यात्रा न केवल भारत और पाकिस्तान के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रतिबिंबित करती है, बल्कि दोनों देशों के विभाजित सिंधी परिवारों के मजबूत बंधन को भी दर्शाती है। विभाजन के बाद भी यह समुदाय अपनी पारंपरिक प्रथाओं को संरक्षित रखने में प्रतिबद्ध है।