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प्रवासी बच्चों के माता-पिता में अकेलेपन से मानसिक तनाव का खतरा: निमहांस अध्ययन
भारतीय मानस स्वास्थ्य संस्थान (निमहांस) के एक हालिया अध्ययन में पाया गया है कि जिन माता-पिता के बच्चे विदेश में रहते हैं, वे अकेलेपन और अत्यधिक मनोरंजन के सहारे से जुड़े मानसिक संकट का सामना करते हैं। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस से पहले यह निष्कर्ष विशेष महत्व रखता है।
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निमहांस द्वारा संचालित शोध में उजागर हुआ है कि प्रवासी बच्चों के माता-पिता में मनोवैज्ञानिक संकट की दर बेहद चिंताजनक है। अध्ययन के अनुसार, ऐसे माता-पिता अपने बच्चों से दूरी के कारण गहरे अकेलेपन का अनुभव करते हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
शोध में यह भी पाया गया कि इन माता-पिता में वेब सीरीज और दूरदर्शन कार्यक्रमों का अत्यधिक उपभोग का रुझान देखा जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अत्यधिक मनोरंजन देखना आत्ममुखी मानसिकता का संकेत है और अकेलेपन से निकलने का एक अस्वास्थ्यकर तरीका है।
10 अक्टूबर को मनाया जाने वाला विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस इस समस्या की ओर ध्यान आकर्षित करने का अवसर प्रदान करता है। निमहांस के निष्कर्ष भारतीय समाज में एक बढ़ती हुई समस्या को रेखांकित करते हैं, जहां वैश्विक पलायन और परिवार विघटन सामाजिक मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर रहे हैं।
यह अध्ययन प्रवासी बच्चों के माता-पिता के लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं और सहायता तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि पारिवारिक परामर्श, सामुदायिक समर्थन नेटवर्क और नियमित व्यावसायिक सहायता ऐसी स्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।