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मानसून सत्र 'जीवन रक्षक यंत्र' पर: शाह की सीमांकन विधेयक के लिए दो-तिहाई बहुमत की मांग
कांग्रेस का आरोप है कि संसद का मानसून सत्र असामान्य रूप से अभी भी लंबित है। 13 अगस्त को दोनों सदनों को स्थगित किए जाने के 25 दिन बाद भी सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है।
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नई दिल्ली - कांग्रेस ने संसद के मानसून सत्र की असामान्य स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। पार्टी के महासचिव जयराम रमेश के अनुसार, 13 अगस्त को दोनों सदनों को स्थगित किए जाने के 25 दिन बाद भी सत्र को औपचारिक रूप से समाप्त नहीं किया गया है, जिससे यह स्थिति सदन के "जीवन रक्षक यंत्र" पर चलने जैसी प्रतीत होती है।
विपक्ष का मानना है कि यह असामान्य स्थिति गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सीमांकन से संबंधित विधेयकों को पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। कांग्रेस के नेताओं ने इस मुद्दे पर सरकार के रवैये को लेकर चिंता व्यक्त की है।
संसदीय परंपरा के अनुसार, जब दोनों सदनों को स्थगित कर दिया जाता है, तो सत्र को निर्धारित समय सीमा के भीतर औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया जाना चाहिए। विपक्ष का आरोप है कि वर्तमान स्थिति इस परंपरा से हटकर की गई है।
यह विवाद संसद में विभिन्न महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर चल रहे राजनीतिक तनाव का एक नया आयाम है। सरकार की इस रणनीति को लेकर विपक्षी दलों में मजबूत प्रतिक्रिया देखी जा रही है।