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मानसून सत्र में व्यवधान से संसद की कार्यक्षमता पर उठे सवाल

संसद के मानसून सत्र में बार-बार व्यवधान से लोकसभा केवल 15 प्रतिशत निर्धारित समय तक काम कर सकी। इससे विधायी जांच और जवाबदेही को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।

LSN India · 25 August 2026

मानसून सत्र में व्यवधान से संसद की कार्यक्षमता पर उठे सवाल

संसद के मानसून सत्र में आए व्यवधानों ने एक बार फिर से राष्ट्रीय विधानमंडल की कार्यक्षमता पर सवाल उठाए हैं। लोकसभा अपने निर्धारित समय का मात्र 15 प्रतिशत ही कार्य कर सकी, जिससे सत्र के दौरान महत्वपूर्ण कानून निर्माण और विधायी गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

सत्र में बार-बार आने वाले व्यवधानों के कारण संसद की कार्यप्रणाली में गंभीर बाधा आई है। सदन में होने वाली इन रुकावटों ने सरकारी कामकाज की पारदर्शिता और जवाबदेही के मुद्दों को केंद्र में लाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्र की इस कम उत्पादकता से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नुकसान होता है।

लोकसभा के बहुत कम समय तक कार्य करने से अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा का अवसर नहीं मिल सका। सांसदों को विधायी कार्यों पर पर्याप्त ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई हुई। इस स्थिति से संसद की जवाबदेही और विधायी निरीक्षण क्षमता पर प्रश्नचिह्न लगते हैं।

सत्र के सकारात्मक संचालन और समय के सदुपयोग को लेकर संसद प्रशासन और राजनीतिक दलों से सुधार की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। विश्लेषकों का सुझाव है कि भविष्य के सत्रों में सदन की कार्यप्रणाली में सुधार लाया जाना चाहिए ताकि जनहित से जुड़े मुद्दों पर बेहतर विचार-विमर्श संभव हो सके।