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रेलवे के यात्री सुविधाओं में खामियों पर संसदीय समिति की कार्रवाई
भारतीय ऑडिट विभाग की रिपोर्ट में सर्वे किए गए 96 प्रतिशत स्टेशनों पर जैव शौचालयों में कमी पाई गई है। संसद की लोक लेखा समिति ने रेलवे को 2007 से लगातार दिए गए सुझाव नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है।
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भारतीय रेलवे के यात्री सुविधाओं से जुड़ी लंबी चिंताओं को लेकर संसद की लोक लेखा समिति ने कड़ी नकेल कसी है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे किए गए स्टेशनों में से लगभग 96 प्रतिशत पर जैव शौचालयों की गुणवत्ता में गंभीर कमी मिली है।
समिति की ओर से यह चेतावनी दी गई है कि रेलवे प्रबंधन पिछले डेढ़ दशक से दिए जा रहे सुधार सुझाव को लगातार अनदेखा कर रहा है। वर्ष 2007 से लेकर अब तक यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कई अवलोकन दर्ज किए गए हैं, लेकिन उन पर उचित कार्रवाई नहीं हुई है।
लोक लेखा समिति के अध्यक्ष ने रेलवे मंत्रालय को एक महीने की अवधि में इस संबंध में अपना जवाब सौंपने का निर्देश दिया है। समिति रेलवे से यह भी जानना चाहती है कि यात्री सुविधाओं के संबंध में किए गए वादों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।
यह मामला रेलवे सेक्टर में बुनियादी ढांचे और यात्रियों के लिए जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था को लेकर उठने वाले सवालों को और तीव्र कर देता है। समिति की कार्रवाई से लगता है कि रेलवे को यात्रियों के मूलभूत अधिकारों को प्राथमिकता देनी होगी।