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संसद पैनल ने दिल्ली से बाहर पहली बार विदेशी चंदा कानून पर विचार-विमर्श किया
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) पर संसदीय समिति ने पूर्वोत्तर भारत में पहली बार विस्तृत परामर्श का आयोजन किया। मेघालय, मणिपुर, नागालैंड और असम से लगभग 40 संगठनों ने समिति के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए।
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विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम से संबंधित संसदीय समिति ने देश की राजधानी से बाहर अपनी तरह का पहला परामर्श सत्र आयोजित किया है। इस बैठक में पूर्वोत्तर भारत के चार राज्यों से जुड़े लगभग 40 संगठनों ने भाग लिया और केंद्रीय कानून के संबंध में अपनी टिप्पणियां दीं।
मेघालय, मणिपुर, नागालैंड और असम से आए संगठनों को एफसीआरए की व्यावहारिक कार्यप्रणाली और इसके क्रियान्वयन संबंधी अपनी चिंताएं व सुझाव रखने का मौका मिला। यह पहल विभिन्न क्षेत्रों के हितधारकों तक सीधे पहुंचने के समिति के प्रयास को दर्शाती है।
विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम भारत में विदेशी धन के प्रवाह को नियंत्रित करता है। पूर्वोत्तर भारत में संगठनों से सीधे संपर्क स्थापित करके समिति क्षेत्रीय दृष्टिकोण और चिंताओं को समझने का प्रयास कर रही है।
यह दौरा संसदीय निकायों द्वारा नीति निर्माण प्रक्रिया में विभिन्न क्षेत्रों की आवाजें सुनने की बढ़ती प्रवृत्ति के अनुरूप है। समिति द्वारा एकत्र किए गए सुझाव भविष्य में कानून में संशोधन या इसके कार्यान्वयन में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।