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प्रिंसटन के शोधकर्ताओं ने विकिरण शीतलन से इमारत को 3.9 डिग्री ठंडा रखा
प्रिंसटन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक का सफल परीक्षण किया है जो बिना किसी यांत्रिक व्यवस्था के इमारतों को प्राकृतिक तरीके से ठंडा रखती है। विशेष छत की व्यवस्था से गर्मी सीधे आकाश की ओर निकल जाती है।
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प्रिंसटन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 2023 में विकिरण शीतलन (रेडिएटिव कूलिंग) तकनीक का परीक्षण किया है, जिसमें एक परीक्षण संरचना बाहरी तापमान से 3.9 डिग्री सेल्सियस अधिक ठंडी रही। यह निष्कर्ष निष्क्रिय शीतलन पद्धति की क्षमता को दर्शाता है।
शोध में विशेष छत की सहायता से गर्मी को सीधे आकाश की ओर निर्देशित किया गया। साथ ही, संरचना के खुले भागों से प्राकृतिक वायु प्रवाह को बढ़ावा दिया गया। इस द्वैध प्रणाली ने परीक्षण संरचना को महत्वपूर्ण रूप से ठंडा रखने में मदद की।
शोधकर्ताओं ने विकिरण शीतलन को तापीय द्रव्यमान और तापमान-चालित वेंटिलेशन के साथ जोड़कर काम किया। यह संयोजन प्राकृतिक प्रक्रियाओं का लाभ उठाता है, जिससे इमारतें बिना विद्युत-चालित जलवायु नियंत्रण प्रणाली के ठंडी रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पद्धति भारत जैसे देशों में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, जहां ऊर्जा खपत कम करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। निष्क्रिय शीतलन तकनीक से आवासीय और व्यावसायिक इमारतों में शीतलन लागत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।