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NPS फंड मैनेजर बदलने से पहले बाजार चक्र का विश्लेषण जरूरी
राष्ट्रीय पेंशन योजना में कमजोर रिटर्न मिलने पर फंड मैनेजर बदलने का निर्णय जल्दबाजी में न लें। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पहले यह जांचें कि यह कमजोरी बाजार चक्र की वजह से है या प्रबंधक की असफलता के कारण।
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राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) के अंतर्गत निवेशकों को अपने फंड मैनेजर में बदलाव करते समय सावधानी बरतनी चाहिए। वित्तीय सलाहकारों का मानना है कि कमजोर रिटर्न का कारण हमेशा फंड मैनेजर की असक्षमता नहीं होता, बल्कि अक्सर यह बाजार के आवर्ती चक्र का हिस्सा होता है।
एक्सपर्ट सुझाते हैं कि निवेशकों को विभिन्न बाजार चक्रों में फंड के प्रदर्शन का विश्लेषण करना चाहिए। यदि किसी विशेष फंड मैनेजर का रिटर्न कई बाजार चक्रों में लगातार कमजोर रहता है, तभी मैनेजर बदलने का विचार किया जाना चाहिए। महज एक या दो तिमाहियों की खराब परफॉर्मेंस के आधार पर जल्दबाजी करना निवेशकों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
बाजार की अस्थिरता के दौरान भी विभिन्न फंड मैनेजरों की रणनीति अलग-अलग परिणाम देती है। दीर्घकालिक निवेश के लिए निवेशकों को धैर्य रखना चाहिए और तुलनात्मक रूप से अन्य फंड्स की परफॉर्मेंस के साथ अपने फंड की तुलना करनी चाहिए। एनपीएस में निवेश करने वाले व्यक्तियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे अपने पेंशन लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए ही ऐसे निर्णय लें।