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किशोर लड़कियों में PCOS के मामले बढ़ रहे हैं: AIIMS की चेतावनी
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के विशेषज्ञों ने 11 से 19 साल की लड़कियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम के बढ़ते प्रसार पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। माता-पिता और किशोरियों को इस स्वास्थ्य समस्या के प्रति सचेत रहने की जरूरत है।
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दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के चिकित्सकों ने किशोर आयु वर्ग की लड़कियों में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के मामलों में चिंताजनक वृद्धि की ओर ध्यान आकर्षित किया है। PCOS एक हार्मोनल विकार है जो प्रजनन आयु की महिलाओं को प्रभावित करता है, लेकिन हाल के वर्षों में इसका निदान काफी कम उम्र में हो रहा है।
इस स्थिति के प्रमुख लक्षणों में अनियमित मासिक धर्म, चेहरे और शरीर पर अत्यधिक बालों का विकास तथा मुंहासे शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, ये लक्षण कई बार युवा लड़कियों और उनके माता-पिता द्वारा नजरअंदाज कर दिए जाते हैं, जिससे निदान में देरी होती है और स्थिति जटिल हो जाती है।
संस्थान के डॉक्टरों ने माता-पिता को सलाह दी है कि वे अपनी बेटियों के स्वास्थ्य में किसी भी असामान्य बदलाव पर ध्यान दें। विशेषकर यदि मासिक धर्म में अनियमितता या त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ रही हों तो तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। आधुनिक जीवनशैली, तनाव और आहार संबंधी कारकों को इस रोग के बढ़ने के पीछे के प्रमुख कारण माना जा रहा है।
चिकित्सकों का मानना है कि PCOS का शीघ्र निदान और उचित प्रबंधन से इसके दुष्प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव प्रबंधन को इस स्थिति को नियंत्रित रखने के प्रमुख तरीके माने जाते हैं।