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विरोध स्थलों पर दीर्घकालीन कब्जे की अनुमति नहीं: सीजेआई सूर्यकांत
मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. सूर्यकांत ने जंतर-मंतर पर चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शनों में पुलिस कार्रवाई को लेकर सुनवाई के दौरान कहा कि किसी भी सार्वजनिक स्थान पर स्थायी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने विरोध के अधिकार और सार्वजनिक सुविधाओं तक समान पहुंच के बीच संतुलन पर जोर दिया।
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नई दिल्ली में राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख प्रदर्शन स्थल जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध आयोजित प्रदर्शनों को लेकर दायर याचिकाओं की सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश ने यह टिप्पणी की। सीजेआई सूর्यकांत ने स्पष्ट किया कि हालांकि नागरिकों को विरोध प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन इसका अर्थ किसी सार्वजनिक स्थान पर अनिश्चितकालीन कब्जा नहीं हो सकता।
न्यायालय की इस टिप्पणी का आशय यह है कि प्रदर्शनकारियों को निर्धारित समय सीमा के अंतर्गत अपने अधिकार का प्रयोग करना चाहिए। सीजेआई ने जोर देते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अन्य नागरिकों की सुविधा और आवागमन भी सुनिश्चित रहना चाहिए। इससे सभी के अधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास दिखाई देता है।
मुख्य न्यायाधीश की यह स्थिति प्रदर्शन के अधिकार को मान्यता देते हुए भी सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। न्यायालय इस मामले में संवेदनशील मुद्दों के बीच संतुलन बिठाने की कोशिश कर रहा है, जहां एक ओर नागरिक अधिकार हैं तो दूसरी ओर सार्वजनिक सुविधाओं की रक्षा करनी है।