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व्यक्तिगत गारंटीकर्ताओं से कर्जदाताओं को वसूली में सुधार
भारतीय दिवाला बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि व्यक्तिगत गारंटीकर्ताओं के विरुद्ध कार्यवाही से बकाया राशि की वसूली में इजाफा हो रहा है। हालांकि, अब तक की जाने वाली वसूली की राशि अभी भी काफी सीमित बनी हुई है।
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भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, साधारण कर्जदारों के व्यक्तिगत गारंटीकर्ताओं से वसूली प्रक्रिया में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है। बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा दिवालिया प्रक्रिया के तहत गारंटीकर्ताओं के खिलाफ की गई कार्यवाही से कुछ सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं।
दिवाला समाधान प्रक्रिया के माध्यम से बकाया राशि की वसूली के प्रयास तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं। व्यक्तिगत गारंटीकर्ताओं के खिलाफ दायर मामलों की संख्या में वृद्धि से संकेत मिलता है कि वित्तीय संस्थान इस दिशा में अधिक सक्रिय हो रहे हैं।
इसके बावजूद, आईबीबीआई के आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि अब तक की गई कुल वसूली की मात्रा अभी भी काफी कम है। कुल बकाया राशि की तुलना में वास्तविक वसूली की राशि महज एक बहुत छोटा अंश ही रही है। विश्लेषकों का मानना है कि कानूनी प्रक्रियाओं में समय लगने और गारंटीकर्ताओं की आर्थिक स्थिति के कारण वसूली प्रभावित हो रही है।
इस सुस्त प्रगति के बावजूद, कर्जदाताओं के लिए यह सुधार एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में दिवाला बोर्ड की बेहतर कार्यप्रणाली से वसूली की दर में और भी सुधार हो सकता है।