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मुस्लिम विवाह कानून POCSO से बड़ा नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि व्यक्तिगत कानून विवाह की वैधता तय कर सकते हैं, लेकिन आपराधिक कानून में अपवाद नहीं बना सकते। न्यायालय ने बलात्कार और POCSO अधिनियम के तहत दर्ज FIR को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी।

LSN India · 26 September 2026

मुस्लिम विवाह कानून POCSO से बड़ा नहीं: दिल्ली उच्च न्यायालय

दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून के अंतर्गत विवाह होने का दावा आपराधिक कानूनों के तहत संरक्षण प्रदान नहीं कर सकता। न्यायालय ने कहा कि जहां संसद ने किसी आपराधिक कानून में कोई अपवाद प्रदान नहीं किया है, वहां व्यक्तिगत कानून उसे बना नहीं सकता।

यह फैसला एक व्यक्ति की याचिका को खारिज करने के दौरान आया, जिसने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और बाल यौन शोषण निवारण अधिनियम (POCSO) के तहत दर्ज बलात्कार के आरोप में FIR को रद्द करवाने का प्रयास किया था। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उसका मुस्लिम विवाह हुआ है, इसलिए वह आपराधिक मामले से सुरक्षित है।

न्यायालय के अनुसार, व्यक्तिगत कानून यह निर्धारित कर सकते हैं कि विवाह वैध रूप से संपन्न हुआ है या नहीं, लेकिन इससे आपराधिक कानूनों के दायरे से बाहर नहीं आया जा सकता। POCSO अधिनियम बच्चों की सुरक्षा के लिए बनाया गया एक विशेष कानून है और इसमें विवाह के आधार पर कोई छूट नहीं दी गई है।

यह निर्णय यौन अपराधों, विशेषकर नाबालिगों के खिलाफ अपराधों के मामले में कानून के समक्ष समानता को सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। न्यायालय का यह रुख किसी भी धार्मिक या व्यक्तिगत कानून को संवैधानिक अधिकारों और बाल संरक्षण कानूनों से ऊपर नहीं माना जा सकता, इस सिद्धांत को रेखांकित करता है।