Culture & Entertainment · India Bureau
कैंसर से दादा की मौत के बाद प्रिसिला चैन ने बीमारी को समझने का किया प्रयास
छठी कक्षा में अपने दादा को कैंसर से खोने के बाद प्रिसिला चैन ने इस बीमारी के बारे में जानने के लिए एक कैंसर पाठ्यपुस्तक का सहारा लिया। इस व्यक्तिगत संकट ने उनके जीवन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
LSN India ·

छोटी उम्र में परिवार के किसी प्रिय सदस्य को खोना किसी भी बच्चे के लिए एक कठिन अनुभव होता है। प्रिसिला चैन के साथ भी ऐसा ही हुआ जब वे छठी कक्षा में पढ़ रही थीं और उनके दादा कैंसर से चल बसे। इस दुःखद घटना ने युवा प्रिसिला के मन में कई सवाल छोड़ दिए और वह यह समझना चाहती थीं कि यह बीमारी आखिर क्या है।
इस ज्ञान की खोज में प्रिसिला ने एक कैंसर संबंधी पाठ्यपुस्तक को पढ़ा। इस किताब के माध्यम से उन्होंने न केवल कैंसर के बारे में विस्तार से जाना, बल्कि इस बीमारी से जुड़े वैज्ञानिक पहलुओं को भी समझा। यह व्यक्तिगत अध्ययन उनके लिए एक चिकित्सकीय या वैज्ञानिक करियर की ओर बढ़ने का प्रवेश द्वार साबित हुआ।
बचपन की इस त्रासदी ने प्रिसिला को केवल दुःख नहीं दिया, बल्कि उन्हें एक उद्देश्य भी प्रदान किया। आत्मनिरीक्षण और स्वाध्याय के माध्यम से उन्होंने अपने दर्द को सार्थक दिशा में परिणत किया। दादा की स्मृति ने उन्हें ऐसे क्षेत्र में योगदान देने के लिए प्रेरित किया जहां वे अन्य लोगों की भी मदद कर सकें।