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चुनाव आयोग नियुक्ति कानून को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में
याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के विरुद्ध पूर्वाग्रह का आशय जताया है, जिनके पुत्र कथित रूप से मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में निर्वाचन आयोग के स्थायी वकील के रूप में कार्य करते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित कानूनी प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका को लेकर नई जटिलता सामने आई है। याचिकाकर्ता ने मौजूदा पीठ के एक न्यायाधीश के विरुद्ध पूर्वाग्रह की आशंका व्यक्त करते हुए एक उपचारात्मक याचिका दायर की है।
याचिका में कहा गया है कि संबंधित न्यायाधीश के पुत्र निर्वाचन आयोग के लिए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में स्थायी वकील के रूप में कार्य कर रहे हैं। इस कारण से याचिकाकर्ता का तर्क है कि यह स्थिति न्यायालय की निष्पक्षता को प्रभावित कर सकती है और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को कम कर सकती है।
उपचारात्मक याचिका संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दायर की जा सकती है जब किसी को लगता है कि कोई महत्वपूर्ण न्यायिक प्रश्न अनसुलझा रह गया है। याचिकाकर्ता का मानना है कि इस पूर्वाग्रह की आशंका के कारण मामला उचित रूप से सुना नहीं जा सकता है।
चुनाव आयोग और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया भारतीय राजनीति में लंबे समय से विवादास्पद रहा है। नियुक्ति संबंधी कानूनी प्रावधानों की संवैधानिकता को लेकर विभिन्न याचिकाएं न्यायालय में लंबित रहती हैं।