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दवा उद्योग को CDSCO के विलायक नियम में निर्यात स्पष्टता की माँग

फार्मास्यूटिकल कंपनियाँ CDSCO के बैच-वार विलायक मंजूरी नियमों के निर्यात में लागू होने को लेकर स्पष्टता माँग रही हैं। उद्योग प्रतिनिधियों को आशंका है कि अनुमोदन में देरी से ग्रामीण बाजारों सहित आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।

LSN India · 3 November 2026

दवा उद्योग को CDSCO के विलायक नियम में निर्यात स्पष्टता की माँग

भारतीय दवा निर्माताओं ने केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से विलायक संबंधी नए नियमों की व्याख्या स्पष्ट करने की माँग की है। विशेष रूप से, उद्योग को यह जानना है कि बैच-दर-बैच विलायक अनुमोदन के नियम निर्यात किए जाने वाले फार्मास्यूटिकल उत्पादों पर भी लागू होंगे या केवल घरेलू बाजार के लिए हैं।

फार्मा कंपनियों के प्रमुख अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियामक आवश्यकताओं में अस्पष्टता से दवाओं की मंजूरी प्रक्रिया में विलंब हो सकता है। इससे न केवल अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में आपूर्ति प्रभावित होगी, बल्कि भारत के ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता भी जोखिम में पड़ सकती है।

उद्योग ने तर्क दिया है कि विलायक संबंधी कठोर आवश्यकताएँ निर्यातित दवाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय नियामक मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने से भारतीय फार्मा क्षेत्र की प्रतिष्ठा बनी रहेगी और निर्यात-आय को क्षति नहीं होगी।

CDSCO से स्पष्ट दिशानिर्देश आने के बाद ही फार्मा कंपनियाँ अपनी उत्पादन और वितरण रणनीति को अंतिम रूप दे सकेंगी। निकट भविष्य में नियामक स्पष्टता से ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दवा आपूर्ति श्रृंखला सुचारु रहे और मरीजों को दवाओं की कोई कमी न हो।