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पट्टिनप्पक्कम परियोजना को रोकने की मांग, मद्रास उच्च न्यायालय में PIL
मद्रास उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका में पट्टिनप्पक्कम असेंबली-सचिवालय परिसर परियोजना को त्यागने की मांग की गई है। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन 5 अक्टूबर, 2026 को इस मामले की सुनवाई करेंगे।
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मद्रास उच्च न्यायालय में दायर एक जनहित याचिका में पट्टिनप्पक्कम स्थित असेंबली-सचिवालय परिसर परियोजना को तत्काल प्रभाव से त्यागने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने इस परियोजना से जुड़ी कथित खामियों और सार्वजनिक हित संबंधी चिंताओं को उजागर करते हुए न्यायालय का हस्तक्षेप मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ 5 अक्टूबर, 2026 को इस मामले की सुनवाई करने के लिए निर्धारित की गई है। याचिका में परियोजना के संबंध में गंभीर प्रश्न उठाए गए हैं और इसके कार्यान्वयन को लेकर विभिन्न आपत्तियां दजर्ज की गई हैं।
यह परियोजना तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में विधानसभा और सचिवालय के कार्यों को एक ही परिसर में केंद्रीकृत करने के लिए प्रस्तावित थी। याचिकाकर्ता का तर्क है कि परियोजना से संबंधित निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इसमें पर्यावरणीय मानदंडों का भी उल्लंघन हुआ है।
न्यायालय द्वारा आने वाली सुनवाई में परियोजना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत विचार किया जाएगा। याचिका के निपटारे में न्यायालय के निर्णय को तमिलनाडु में बुनियादी ढांचा विकास से संबंधित भविष्य की परियोजनाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।