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पितृ पक्ष 2026: तारीख, नियम और तर्पण का शुभ समय
पितृ पक्ष में पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने से पहले पंचबलि का विधान और तर्पण के शुभ मुहूर्त को समझना आवश्यक है। इस वर्ष तर्पण के लिए कुतुप काल की विस्तृत जानकारी यहां दी गई है।
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पितृ पक्ष की शुरुआत आश्विन मास के कृष्ण पक्ष से होती है और यह पखवाड़े भर चलता है। इस दौरान हिंदू परिवारों में अपने पूर्वजों के लिए विशेष पूजन और तर्पण की परंपरा मानी जाती है। सही तारीख और समय जानने के लिए पंचांग परामर्श आवश्यक है।
पितृ पक्ष में भोजन का वितरण करने से पहले पंचबलि का प्रावधान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस विधि में गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी को भोजन अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि यह पाँचों को खिलाए बिना पितरों को दिया गया भोजन अधूरा रहता है।
तर्पण की प्रक्रिया सूर्योदय के बाद की जाती है, लेकिन दोपहर का समय विशेष महत्व रखता है। इस वर्ष दोपहर 11:36 से 12:24 बजे तक का समयावधि कुतुप काल के रूप में जाना जाता है, जिसे तर्पण के लिए सबसे अनुकूल माना गया है। इसी समय में तर्पण करने से पितरों को सर्वाधिक संतुष्टि मिलती है।
तर्पण के नियमों का पालन करते समय पवित्रता और श्रद्धा दोनों आवश्यक हैं। परिवार के सभी सदस्यों को इस अवसर पर अपने-अपने पूर्वजों को स्मरण करना चाहिए। सही मुहूर्त में इस परंपरा को निभाने से पारिवारिक कल्याण और मानसिक शांति प्राप्त होती है।