World · India Bureau
शरद पूर्णिमा पर ग्रहों का विपरीत प्रभाव, ज्योतिषियों ने बताए सावधानियां
25 अक्टूबर 2026 को शरद पूर्णिमा के दिन बुध और शुक्र की वक्री गति के साथ शनि-चंद्र विषयोग का संयोग बनने जा रहा है। ज्योतिषीय विश्लेषकों के अनुसार इस खगोलीय स्थिति के परिणाम कई क्षेत्रों में देखे जा सकते हैं।
LSN India ·

आगामी शरद पूर्णिमा पर खगोल जगत में एक विशेष संयोजन देखने को मिलेगा जिसे लेकर ज्योतिषीय परंपराओं में विशेष चिंता व्यक्त की जा रही है। इस तारीख को बुध ग्रह की वक्री अवस्था, शुक्र की पृथ्वी की ओर गति और शनि-चंद्र का विषयोग एक साथ सक्रिय रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं में ऐसे संयोग को सामाजिक और आर्थिक क्षेत्रों में अस्थिरता का संकेत माना जाता है।
पारंपरिक ज्योतिष ग्रंथों के अनुसार, इस अवधि में संचार और वाणिज्य संबंधी कार्यों में बाधा आ सकती है। बुध की वक्री गति से व्यावहारिक निर्णयों में विलंब हो सकता है, जबकि शनि-चंद्र का विषयोग भावनात्मक अस्थिरता लाता है। ऐसे संयोग के दौरान बड़े निवेश और महत्वपूर्ण समझौतों से बचने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिषीय परंपरा के अनुरूप इस अवधि में कुछ निवारक उपाय सुझाए जा रहे हैं। शरद पूर्णिमा पर चंद्र देव को जल और दूध का अर्घ्य दिया जाना चाहिए तथा हनुमान चालीसा का पाठ करना लाभकारी माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय सत्य पर दृढ़ रहना और जल्दबाजी में कोई निर्णय न लेना ही सबसे उपयुक्त रणनीति है।