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आंवला और मोरिंगा से ग्रामीण सशक्तिकरण और पोषण को बल: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के हर क्षेत्र के पास अनूठे फल, पारंपरिक कला और विशेष कौशल हैं। उन्होंने इन संसाधनों को ग्रामीण विकास और पोषण सुरक्षा के लिए लामबंद करने पर जोर दिया।
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भारत के विभिन्न क्षेत्रों में पारंपरिक कृषि उत्पादों के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आंवला और मोरिंगा जैसी फसलें ग्रामीण आबादी के सामाजिक-आर्थिक उन्नयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने विचार व्यक्त किया कि देश के हर कोने में अलग-अलग पारंपरिक कृषि पद्धतियां, स्थानीय फल और हस्तकला विद्याएं मौजूद हैं जो अभी तक पूर्ण संभावना के साथ विकसित नहीं हुई हैं।
प्रधानमंत्री के अनुसार, इन क्षेत्रीय विशिष्टताओं को सही दिशा और समर्थन दिए जाने पर ये ग्रामीण समुदायों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित कर सकती हैं। आंवला और मोरिंगा जैसी फसलें न केवल स्वास्थ्य लाभ प्रदान करती हैं, बल्कि इनसे जुड़े मूल्य-संवर्धन गतिविधियों से ग्रामीण आय में भी वृद्धि हो सकती है। ये उत्पाद पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी कारगर साबित हो सकते हैं।
प्रधानमंत्री का मानना है कि भारत की विविधता इसकी ताकत है और हर क्षेत्र की अपनी पहचान और संभावनाएं हैं। स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तरीकों से जोड़कर ग्रामीण विकास के नए आयाम खोले जा सकते हैं। इस दिशा में सामुदायिक स्तर पर पहल किए जाने की आवश्यकता है ताकि हर क्षेत्र अपनी अंतर्निहित क्षमता को पूरी तरह विकसित कर सके।