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POCSO पीड़ित को चोट के निशान न होने से मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद HC
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि यौन अपराध से पीड़ित बच्चे को केवल शारीरिक चोट के निशान न होने के कारण मुआवजे से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला लखनऊ में दर्ज एक मामले में आया है।
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि भारतीय यौन अपराध (बच्चों का संरक्षण) अधिनियम, 2012 के तहत पीड़ित को मुआवजे से केवल इसलिए वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उसके शरीर पर चोट के निशान नहीं हैं।
यह मामला लखनऊ के सरोजिनी नगर पुलिस स्टेशन में 7 दिसंबर, 2022 को दर्ज एक प्रथम सूचना रिपोर्ट से संबंधित है। इस संबंध में अभियोजन पक्ष द्वारा 13 जनवरी, 2023 को आरोप पत्र दाखिल किया गया था।
न्यायालय का यह निर्णय यौन शोषण के मामलों में न्याय प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण दिशानिर्देश स्थापित करता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पीड़ित को मुआवजे का अधिकार विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है, न कि केवल शारीरिक चोटों की दृश्यमान उपस्थिति पर।
यह फैसला बाल संरक्षण कानूनों की व्यापक व्याख्या प्रदान करता है और पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को और अधिक संवेदनशील और समावेशी बनाता है।