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ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका से 1979 के बाद 11 हजार अरब टन बर्फ खो गई
1979 के बाद से ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ में भारी कमी आई है, जिससे विश्व स्तर पर समुद्र का जलस्तर 31.4 मिलीमीटर तक बढ़ गया। नई जांच से पता चलता है कि तेजी से बहने वाले ग्लेशियर इस नुकसान के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।
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1979 के बाद से ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका में कुल 11,309 अरब टन बर्फ का नुकसान हुआ है, जिसके कारण विश्व के समुद्रों का जलस्तर 31.4 मिलीमीटर तक ऊंचा हो गया है। यह आंकड़ा एक व्यापक नई समीक्षा में सामने आया है जो ध्रुवीय बर्फ के पिघलने की गंभीरता को दर्शाता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, बर्फ के इस विशाल नुकसान में तेजी से बहने वाले ग्लेशियरों की भूमिका 84 प्रतिशत है, जबकि सतह पर होने वाली पिघलन का योगदान 16 प्रतिशत है। ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ के नुकसान का प्रमुख कारण गतिशील ग्लेशियर हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्र के बढ़ते तापमान का ध्रुवीय बर्फ की चादरों पर दीर्घकालीन प्रभाव पड़ रहा है। यह जलवायु परिवर्तन के खतरनाक परिणामों को दर्शाता है, जो समुद्र के जलस्तर में वृद्धि के माध्यम से तटीय इलाकों और द्वीपीय राष्ट्रों के लिए गंभीर चुनौतियां पेश कर रहा है।