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पुलिस को सत्ता का नहीं, राज्य का सेवक होना चाहिए: मद्रास उच्च न्यायालय
मद्रास उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस बदलती हुई सरकार की नहीं, बल्कि स्थायी राज्य की सेवा करे। यह टिप्पणी डीएमके पार्षद को जमानत देते समय की गई।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस व्यवस्था को सत्तारूढ़ दल की नहीं, बल्कि राज्य की सेवा करनी चाहिए क्योंकि राज्य स्थायी संस्था है जबकि सरकार परिवर्तनशील होती है।
न्यायालय ने ये विचार 60 वर्षीय डीएमके पार्षद डी. सुधा को अग्रिम जमानत प्रदान करते समय व्यक्त किए। सुधा पर मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का अपमान करने का आरोप था।
न्यायपालिका का यह निर्देश भारतीय लोकतंत्र में पुलिस की भूमिका और स्वतंत्रता के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों को किसी विशेष राजनीतिक दल के हित में काम नहीं करना चाहिए।
इस मामले में डी. सुधा को जमानत देते हुए न्यायालय ने इस सिद्धांत को रेखांकित किया कि पुलिस तंत्र को संवैधानिक मूल्यों और निष्पक्षता को बनाए रखना चाहिए। यह निर्णय सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है।