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2011 अधिनियम के तहत काश्तकारों की पहचान शुरू करने को लेकर दलों का आग्रह

विभिन्न राजनीतिक दलों ने सरकार से 2011 अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार किरायेदार किसानों की पहचान के लिए व्यवस्थित प्रक्रिया शुरू करने का आह्वान किया है। दलों का मानना है कि इस कदम से लाखों छोटे किसानों को वैधानिक संरक्षण मिल सकेगा।

LSN India · 2 September 2026

2011 अधिनियम के तहत काश्तकारों की पहचान शुरू करने को लेकर दलों का आग्रह

देश भर के राजनीतिक दलों ने सरकार को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें 2011 अधिनियम के तहत किरायेदार किसानों की व्यापक पहचान के लिए तत्काल कार्रवाई का अनुरोध किया गया है। विभिन्न क्षेत्रों में हजारों किसान परिवार भूमि पर खेती करते हैं लेकिन कानूनी स्वीकृति के बिना काम करते रहते हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और आर्थिक सहायता से वंचित रहना पड़ता है।

दलों का तर्क है कि 2011 अधिनियम में किरायेदार किसानों के अधिकारों की व्यापक परिभाषा दी गई है, लेकिन सरकार ने अब तक इसे प्रभावी रूप से लागू नहीं किया है। इस कानून में किसानों की भूमि संबंधी सुरक्षा, ऋण लेने की क्षमता और सामाजिक कल्याण योजनाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने का प्रावधान है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों ने इस मुद्दे पर आम सहमति दिखाते हुए कहा है कि देरी से भारतीय कृषि क्षेत्र में असमानता बढ़ रही है।

राज्य सरकारों से भी अनुरोध किया गया है कि वे अपने स्तर पर किरायेदार किसानों का डेटाबेस तैयार करें और भूमि रजिस्ट्रीकरण में इन्हें शामिल करें। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यवस्थित पहचान प्रक्रिया से लाखों छोटे और सीमांत किसानों को सरकारी मदद, बीमा योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। राजनीतिक दलों ने यह भी सुझाव दिया है कि पहचान प्रक्रिया को अधिकतम पारदर्शिता के साथ संचालित किया जाना चाहिए ताकि सभी योग्य किसानों को लाभ मिल सके।