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1991 के बाद असली बदलाव सांस्कृतिक था: व्यावसायिक गतिविधियों में आया परिवर्तन
उदारीकरण ने लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में व्यापक बदलाव लाए, लेकिन ट्रकिंग व्यवस्था का विखंडन और बुनियादी ढांचे की कमियां अभी भी प्रमुख बाधाएं बनी हुई हैं।
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भारत के आर्थिक उदारीकरण के तीन दशक बाद विशेषज्ञों का मानना है कि 1991 के सुधारों का असली प्रभाव सांस्कृतिक और व्यावसायिक दृष्टिकोण में परिवर्तन से आया। व्यावसायिक गतिविधियों के गतिशील तरीकों में यह पारिवर्तन समय के साथ बाजार की कार्यप्रणाली को महत्वपूर्ण रूप से बदल गया।
लॉजिस्टिक्स और परिवहन क्षेत्र में उदारीकरण के सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट दिखाई दिए हैं। तथापि, ट्रकिंग उद्योग का खंडित स्वरूप और बुनियादी ढांचे संबंधी गंभीर अंतराल अभी भी इस क्षेत्र की प्रगति में प्रमुख बाधा बने हुए हैं। छोटे और मध्यम आकार की परिवहन इकाइयों की अधिकता से समन्वय और दक्षता की समस्याएं बनी रहती हैं।
बुनियादी ढांचे की अपर्याप्तता व्यावहारिक चुनौतियों को और गहरा करती है। सड़कों की गुणवत्ता, गोदाम सुविधाओं की कमी और सीमांत इलाकों में परिवहन नेटवर्क का अभाव लॉजिस्टिक्स क्षेत्र की वृद्धि में बाधक साबित हो रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आधारभूत संरचना में निवेश और ट्रकिंग क्षेत्र के संगठित होने से ही इन समस्याओं का समाधान संभव है।