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करवा चौथ से पहले कुम्हारों को मिल रहा व्यावसायिक अवसर
त्यौहार की तैयारी के लिए बढ़ती मांग से कुम्हारों को आमदनी का अच्छा माध्यम मिल गया है। परंपरागत मिट्टी के बर्तनों के जरिए कारीगर लाखों रुपये की आय कर रहे हैं।
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करवा चौथ के आने वाले पर्व से पहले मिट्टी के करवों की मांग बाजार में तेजी से बढ़ गई है, जिससे कुम्हार समुदाय को आर्थिक लाभ मिल रहा है। इस परंपरागत व्यवसाय के माध्यम से कारीगर काफी अच्छी कमाई कर पा रहे हैं।
कुम्हारों के अनुसार, मिट्टी से बने करवे की कीमत डिजाइन और कारीगरी की गुणवत्ता के आधार पर 20 रुपये से लेकर 50 रुपये तक निर्धारित की जाती है। मांग में इस वृद्धि का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिवार को अकेले 40 हजार करवे बनाने के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं।
त्यौहार की तैयारी के दबाव के कारण परिवार के सभी सदस्य लगातार काम में जुटे हैं। इतनी भारी संख्या में आए ऑर्डरों को पूरा करने के लिए परिवार को अतिरिक्त समय तक काम करना पड़ रहा है।
यह मौसमी व्यावसायिक गतिविधि न केवल व्यक्तिगत कारीगरों के लिए बल्कि संपूर्ण कुम्हार समुदाय के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन जाती है। परंपरागत हस्तशिल्प को इस तरह की मांग संरक्षण और विकास दोनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।