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मुर्गी पालन उद्योग ₹110 प्रति किग्रा जीवित मुर्गी भाव की मांग
हैदराबाद में आयोजित बैठक में मकई की बढ़ती कीमतों और एल नीनो प्रभाव से जुड़ी आपूर्ति समस्याओं पर विचार-विमर्श किया गया। पोल्ट्री उद्योग के हितधारकों ने इन चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत कदम उठाने की अपील की।
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देश के पोल्ट्री उद्योग की प्रमुख समस्याओं पर चर्चा करने के लिए हैदराबाद में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में उद्योग के प्रतिनिधियों ने जीवित मुर्गियों के लिए ₹110 प्रति किलोग्राम का न्यूनतम मूल्य निर्धारित करने की मांग उठाई है।
इस कदम का कारण मकई की कीमतों में तेजी से वृद्धि है, जो मुर्गियों के चारे का प्रमुख घटक है। मकई की आपूर्ति में कमी के पीछे एल नीनो जलवायु प्रभाव को जिम्मेदार माना जा रहा है, जिसने वैश्विक मौसम पैटर्न को प्रभावित किया है।
पोल्ट्री उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण उत्पादकों पर भारी दबाव पड़ रहा है। मकई और अन्य चारे सामग्री की महंगाई से उत्पादन लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो सीधे तौर पर मुर्गी पालन के लाभांश को प्रभावित कर रही है।
इस बैठक में भाग लेने वाले उद्योग विशेषज्ञों ने एल नीनो के प्रभाव से उबरने के लिए दीर्घकालीन रणनीति विकसित करने पर भी जोर दिया है। वे सरकार से चारे की कीमतों को नियंत्रित करने और पोल्ट्री क्षेत्र को राहत प्रदान करने के उपायों की मांग कर रहे हैं।