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जम्मू-कश्मीर में गरीबी की परिभाषा को लेकर नौकरी कोटा विवाद
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के मानदंड और आधिकारिक बीपीएल डेटा में विरोधाभास से राजनीतिक नेताओं का आरोप है कि घाटी के गरीबों को जानबूझकर ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र से वंचित किया जा रहा है।
LSN India ·
जम्मू और कश्मीर में सरकारी नौकरियों के आरक्षण को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है जिसकी जड़ में गरीबी की परिभाषा में मतभेद है। राजनीतिक नेताओं का दावा है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए निर्धारित मानदंड, क्षेत्र की आधिकारिक बीपीएल आबादी के डेटा के साथ मेल नहीं खा रहे हैं।
इस विसंगति के कारण घाटी में ऐसे परिवार ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र प्राप्त करने में विफल हो रहे हैं जो सरकार के अपने गरीबी सूचकांक के अनुसार आर्थिक रूप से कमजोर माने जाते हैं। विरोधी दलों के नेताओं का आरोप है कि यह स्थिति किसी संयोग से नहीं बल्कि जानबूझकर की जा रही है ताकि घाटी के गरीब लोग सरकारी नौकरियों के इस आरक्षण से लाभान्वित न हो सकें।
इस विवाद ने जम्मू-कश्मीर में सामाजिक न्याय और नौकरी आरक्षण नीति को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय राजनेताओं का मानना है कि केंद्रीय मानदंडों को क्षेत्रीय परिस्थितियों के अनुसार संशोधित किया जाना चाहिए ताकि वास्तविक रूप से वंचित वर्ग को सुविधा मिल सके।
हालांकि, इस मामले को लेकर अभी आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि केंद्र और क्षेत्रीय सरकार को इस विसंगति को दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए।