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बिजली मंत्रालय ने ट्रांसमिशन भूमि मुआवजे के लिए बाजार दर निर्धारित की
सरकार ने राइट ऑफ वे विवादों को सुलझाने के लिए नई नीति लागू की है जो नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के विकास में बाधा बन रहे थे। यह कदम बिजली संचरण नेटवर्क के विस्तार को तेज करने के लिए उठाया गया है।
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भारत के बिजली मंत्रालय ने ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण में मुआवजे की दरें बाजार दर के आधार पर तय करने के लिए नए मानदंड जारी किए हैं। यह निर्णय राइट ऑफ वे से संबंधित लंबित विवादों को सुलझाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
राइट ऑफ वे विवाद, जहां जमीन मालिकों और सरकारी एजेंसियों के बीच भूमि उपयोग को लेकर असहमति होती है, ने अब तक बिजली संचरण परियोजनाओं के कार्यान्वयन में गंभीर बाधाएं उत्पन्न की थीं। ये विवाद विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों से बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने के लिए आवश्यक ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण में समस्या पैदा कर रहे थे।
नई नीति में भूमि मालिकों को बाजार-दर के अनुरूप न्यायसंगत मुआवजा देने की व्यवस्था की गई है, जिससे भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता आएगी। इस कदम से आशा की जा रही है कि संचरण परियोजनाओं के निर्माण में तेजी आएगी और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का विस्तार संभव होगा।
भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करने और सौर तथा पवन ऊर्जा परियोजनाओं से जुड़ने के लिए एक मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क आवश्यक है। विश्लेषकों के अनुसार, इस नीतिगत परिवर्तन से पूरे क्षेत्र में बिजली संचरण बुनियादी ढांचे के विकास को गति मिलेगी।