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प्रमुख संस्थानों में मालिकाना सॉफ्टवेयर पर 134 करोड़ रुपये का खर्च

ओपन सोर्स कलेक्टिव का दावा है कि भारतीय विश्वविद्यालयों द्वारा सॉफ्टवेयर पर खर्च किए जा रहे इस बड़े हिस्से को मुक्त स्रोत विकल्पों से बदला जा सकता है। संगठन मानता है कि यह राशि कुल व्यय का केवल एक अंश है।

LSN India · 4 September 2026

प्रमुख संस्थानों में मालिकाना सॉफ्टवेयर पर 134 करोड़ रुपये का खर्च

भारत के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में मालिकाना सॉफ्टवेयर लाइसेंस पर 134 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च हो रहा है। यह जानकारी ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर समर्थकों के संगठन फॉस यूनाइटेड द्वारा साझा की गई है।

फॉस यूनाइटेड का कहना है कि यह राशि भारतीय विश्वविद्यालयों द्वारा सॉफ्टवेयर लाइसेंस पर किए जाने वाले कुल व्यय का केवल एक हिस्सा है। संगठन के अनुसार, इन संस्थानों में मुक्त और खुले स्रोत के सॉफ्टवेयर विकल्पों का व्यापक रूप से उपयोग किया जा सकता है, जिससे सार्वजनिक धन की बचत हो सकती है।

शैक्षणिक क्षेत्र में खुले स्रोत प्रौद्योगिकी को अपनाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। समर्थकों का तर्क है कि सरकारी और सार्वजनिक संस्थानों को अपने बजट को अधिक कुशलतापूर्वक प्रबंधित करना चाहिए और ओपन सोर्स समाधानों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

फॉस यूनाइटेड की यह रिपोर्ट भारत में डिजिटल स्वतंत्रता और सार्वजनिक संसाधनों के सुदृढ़ उपयोग के बारे में बहस को नई ऊंचाई पर ले गई है। यह विचार भी उठ रहा है कि ओपन सोर्स विकल्पों को अपनाने से संस्थान न केवल पैसे बचा सकते हैं, बल्कि तकनीकी स्वावलंबन भी प्राप्त कर सकते हैं।