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राष्ट्रपति मुर्मु ने गुजरात और असम के समान नागरिक संहिता विधेयक को मंजूरी दी
उत्तरप्रदेश के बाद तीसरे और चौथे राज्य में समान नागरिक संहिता कानून लागू होने का रास्ता साफ हो गया है। ये कानून विवाह पंजीकरण, बहुविवाह पर प्रतिबंध और संपत्ति के अधिकारों में समानता सुनिश्चित करते हैं।
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात और असम के समान नागरिक संहिता विधेयकों को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उत्तरप्रदेश के बाद ये दोनों राज्य समान नागरिक संहिता को लागू करने वाले हो गए हैं।
दोनों विधेयकों में विवाह पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा एकविवाह का प्रावधान भी रखा गया है, जिसमें बहुविवाह और द्विविवाह पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया है। इन कानूनों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि ये पुत्र और पुत्रियों को संपत्ति के अधिकारों में समान दर्जा देते हैं।
समान नागरिक संहिता को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में एक प्रमुख उद्देश्य के रूप में निर्धारित किया गया है। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समुदायों के लिए अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक समान कानूनी ढांचा लागू करने का उद्देश्य यह विधेयक पूरा करते हैं।
इन कानूनों के माध्यम से राज्य सरकारें सामाजिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही हैं। गुजरात और असम में इन विधेयकों के लागू होने से देश में समान नागरिक संहिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ा है।