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राष्ट्रप्रथम भावना के साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करें: राष्ट्रपति का शिक्षकों से आह्वान
राष्ट्रपति ने शिक्षकों से अपेक्षा की है कि वे छात्रों में वैज्ञानिक सोच और राष्ट्रीय चेतना का विकास करें। उन्होंने कहा है कि माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा के लिए शिक्षकों पर सर्वोच्च विश्वास करते हैं।
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राष्ट्रपति ने देश के शिक्षकों को छात्रों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षकों को अपने शिक्षार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना का संचार करना चाहिए। यह दृष्टिकोण आने वाली पीढ़ियों को न केवल बेहतर नागरिक बनाएगा बल्कि राष्ट्र के विकास में भी योगदान देगा।
राष्ट्रपति के अनुसार, माता-पिता और अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते समय शिक्षकों पर पूर्ण विश्वास करते हैं। यह विश्वास एक पवित्र जिम्मेदारी है जिसे शिक्षकों को गंभीरता से लेना चाहिए। उन्होंने माना कि शिक्षकों की भूमिका केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए जिम्मेदार हैं।
राष्ट्रपति ने शिक्षकों से आशा की है कि वे अपनी शिक्षा प्रणाली के माध्यम से युवाओं को तार्किक सोच और समालोचनात्मक चिंतन के कौशल प्रदान करें। साथ ही, उन्हें राष्ट्रीय मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति जागरूक बनाना चाहिए। शिक्षकों की इस प्रयास से ही एक सशक्त और प्रगतिशील भारत का निर्माण संभव है।