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प्रतिष्ठित स्कूल ने डिजिटल से किया मुंह मोड़, कागज-कलम की शुरुआत
स्क्रीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंतित एक प्रमुख शिक्षण संस्थान ने डिजिटल उपकरणों को हटाकर पारंपरिक शिक्षा पद्धति को अपनाने का फैसला किया है। यह कदम बताता है कि शिक्षा जगत में आधुनिकता की दिशा अब पलट रही है।
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बच्चों के स्वास्थ्य और मानसिक विकास को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच एक नामी स्कूल ने अपने कक्षाओं से स्क्रीन उपकरणों को हटाने का साहसिक कदम उठाया है। इस निर्णय के माध्यम से संस्थान ने पारंपरिक शिक्षा पद्धति की ओर लौटने का संदेश दिया है, जहां छात्र कागज और कलम का इस्तेमाल करेंगे।
देशभर में शिक्षकों और अभिभावकों के बीच इस बात को लेकर बढ़ती सहमति देखी जा रही है कि स्क्रीन समय से बच्चों में एकाग्रता की कमी, आंखों की समस्या और मानसिक तनाव बढ़ रहा है। इसी समस्या से निपटने के लिए विभिन्न शिक्षण संस्थान वैकल्पिक तरीके अपना रहे हैं।
इस स्कूल का यह कदम प्रौद्योगिकी और परंपरागत शिक्षा के बीच संतुलन खोजने का प्रयास माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हाथ से लिखना बच्चों की स्मृति और सृजनात्मकता को बेहतर तरीके से विकसित करता है।
आने वाले समय में यह देखना बाकी है कि क्या यह प्रयोग अन्य शिक्षण संस्थानों के लिए एक मानदंड स्थापित करेगा और भारत में शिक्षा का भविष्य किस दिशा में जाएगा।